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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची एसआईआर के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का आदेश दिया

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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर को लेकर शुक्रवार को निर्णायक आदेश जारी किया। अदालत ने सिविल न्यायाधीशों के साथ 250 जिला न्यायाधीशों को राज्य में तैनात करने का निर्देश दिया और झारखंड व ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को भी अनुमति दी कि वे उन मामलों को संभालें जिनमें लगभग 80 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर सकती है और यह आदेश पूरी तरह बाध्यकारी हैं। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने पीठ के सामने कहा कि चुनाव आयोग ने न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया है जिसमें उन्हें निर्देशित किया गया कि किसे स्वीकार करना है और किसे नहीं। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि राज्य में तैनात न्यायिक अधिकारी स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय लेंगे और किसी भी बाहरी दबाव या निर्देश से प्रभावित नहीं होंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किन दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी और किसी भी स्तर पर आदेशों से अलग कोई कदम स्वीकार्य नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम विवादित मतदाता सूची की समीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और न्यायिक नियंत्रण स्थापित करने के लिए उठाया। इससे पहले 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने असाधारण निर्देश जारी कर राज्य में विवादित मतदाता सूचियों की समीक्षा में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों की तैनाती करने का आदेश दिया था। इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में दर्ज सभी दावे और आपत्तियां निष्पक्ष तरीके से जांची जाएं और किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपातपूर्ण हस्तक्षेप की अनुमति न दी जाए।

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